आस्था के साथ मनाया जा रहा हैं “चैत्र माह का छठ पर्व”


लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा पूरे बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पारँपरिक विधि-विधान और पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।चार दिन के इस महापर्व का आज सबसे महत्वपूर्ण दिन है।आज साँयकाल में डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा पर हमारी ओर से आप सबको हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएं।
छठी मईया और भगवान भास्कर सबको सुःख शान्ति,समृद्धि और आरोग्य प्रदान करें।

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कौन हैं छठी मइया?
कार्तिक मास की षष्टी को छठ का पर्व मनाई जाती है. छठे दिन पूजी जाने वाली षष्ठी मइया को बिहार में आसान भाषा में छठी मइया कहकर पुकारते हैं. मान्यता है कि छठ पूजा के दौरान पूजी जाने वाली यह माता सूर्य भगवान की बहन हैं. इसीलिए लोग सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया को प्रसन्न करते हैं. वहीं, पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है. छठ मइया को संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि जिन छठ पर्व संतान के लिए मनाया जाता है. खासकर वो जोड़े जिन्हें संतान का प्राप्ति नही हुई. वो छठ का व्रत रखते हैं, बाकि सभी अपने बच्चों की सुख-शांति के लिए छठ मनाते हैं.

छठ का पर्व कार्तिक महीने में मनाया जाता है दिवाली के 6 दिन के पहचान यह पर्व मनाया जाता है बिहार में इस पर्व की तैयारी लोग दिवाली के साथ ही लग जाते हैं सरकारी कार्यालय स्कूलों में 10 दिन की छुट्टी होती है दिवाली से लेकर छठ तक सभी कार्यालय बंद रहते हैं यहां 4 दिन तक चलता है इस पर में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जो इस पर्व को करते हैं उन्हें 2 दिन का उपवास रखना पड़ता है

छठ का पर्व एक आस्था का पर्व होता है. हजारों लोगों की आस्था के साथ जुड़ा हुआ है.  पर्व बिहार और यूपी में बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है लोगों में इस पर्व के प्रति काफी उत्साह देखा जाता है. इस पर्व को लोग घर के सभी परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं ईश्वर में लोग सूर्य भगवान की पूजा करते हैं बिहार में सबसे बड़ा पर्व के रूप में छठ का पर्व जाना जाता है बिहार बासी कहीं भी होते हैं लेकिन छठ का पर्व मनाने के लिए वह घर पर जरूर आते हैं

 

 

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