कानपुर का 29 साल का ये हार्वर्ड पासआउट बना असम में BJP की जीत का हीरो

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नई दिल्ली.मोदी को लोकसभा चुनाव में जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर के कांग्रेस से जुड़ने के बाद बीजेपी को नया किंगमेकर मिल गया है। असम में मिली शानदार जीत में जिस इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट रजत सेठी का अहम रोल बताया जा रहा है। हार्वर्ड ग्रेजुएट 29 साल के रजत ने बीते साल नवंबर में असम के लिए कैम्पेन शुरू किया था। उनकी टीम में 2 लोग ऐसे भी थे जो पहले प्रशांत किशोर के साथ मोदी के लिए काम कर चुके हैं। इस टीम की मेहनत का नतीजा यह रहा कि बीजेपी अब नॉर्थ ईस्ट में पहली बार किसी राज्य में सरकार बनाने जा रही है।
असम में क्या रहे चुनाव नतीजे?
कुल सीट: 126
– बीजेपी+ :86
– कांग्रेस :26
– एआईयूडीएफ :13
– अन्य :1

 

– कानपुर के रहने वाले रजत सेठी ने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की है। बाद में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी में ग्रेजुएशन किया। उनके परिवार की संघ से करीबी रही है।
– 2012 में पढ़ाई के लिए अमेरिका गए।
– 2014 में रजत हार्वर्ड इंडिया एसोसिएशन के लिए इवेंट्स कराते थे। एक बार जब राम माधव वहां गए तो वे उनके संपर्क में आए।
– 2015 में पढ़ाई पूरी करने के बाद माधव के कहने पर रजत भारत लौटे और बीजेपी से जुड़ गए।
– रजत ने टीम बनाने की शुरुआत की। 6 लोगों की टीम में 4 IIT खड़गपुर के पासअाउट थे। 2 मेंबर ऐसे थे जो प्रशांत किशोर की टीम में रहे थे।
– उन्होंने नवंबर 2015 से असम के लिए काम शुरू। बीजेपी के लिए रजत ने ‘असम निर्माण’ का नारा दिया।
– हर दिन 20 घंटे काम करते हुए पूरी टीम राम माधव और अमित शाह के कॉन्टैक्ट में रहती थी।
– वर्ल्ड बैंक में का ने बताया, ”हमारी स्ट्रैटजी थी कि हर दिन कुछ नया करते हुए कांग्रेस या उनके लीडर पर सीधे टारगेट करें। ताकि कांग्रेस बैकफुट पर रहकर सिर्फ जवाब दे सके। इसका फायदा हमें ऐसे मिला कि कांग्रेस का कैम्पेन आचार संहिता लागू होने के सिर्फ एक महीने पहले ही शुरू हो पाया।”
हिलेरी क्लिंटन के लिए भी कर चुके हैं काम
– रजत ने बताया कि हार्वर्ड में कोर्स के दौरान प्रोजेक्ट वर्क के लिए उन्होंने कुछ महीनों तक हिलेरी क्लिंटन के लिए कैम्पेन किया है।
– उनके कोर्स में कैम्पेन मैनेजमेंट का एक प्रोजेक्ट था। इस दौरान उन्हें अमेरिका के इलेक्शन मैनेजमेंट को समझने का मौका मिला।
175 RTI लगाकर तय हुए मुद्दे, ऐसे बनी कैम्पेन स्ट्रैटजी
– रजत की 6 लोगों की टीम में आशीष सोगानी, महेंद्र शुक्ला, शुभ्रास्था और आशीष मिश्रा थे। शुभ्रास्था पहले प्रशांत की टीम में थीं। 2015 में बिहार में महागठबंधन को लेकर उनके प्रशांत से मतभेद हुए और फिर वे उनकी टीम से अलग हो गईं।
– टीम की सीनियर मेंबर शुभ्रास्था शिखा ने बताया कि मोदी ने एक बार अपने भाषण में गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो चावल देने की स्कीम का जिक्र किया था। इस स्कीम की काफी अपील थी। वहीं, अमित शाह ने अपने बयानों में अहम मुद्दे उठाए। ये सारी चीजें हमारी टीम ने ड्राफ्ट की और सजेस्ट की थीं।
– शिखा ने बताया, ”हमने 175 से ज्यादा RTI लगाकर गोगोई के खिलाफ माहौल का फायदा उठाया। पार्टी के टॉप लीडर्स तक हमारे लिए एक मैसेज पर एक्सेस था। इसके चलते हर स्टेप पर मिले उनके सपोर्ट ने विनिंग स्ट्रैटजी को मजबूती दी।”
तरूण गोगाई की फोटो का इस्तेमाल न करने की स्ट्रैटजी
– बीजेपी के स्ट्रैटजिस्ट की टीम में शामिल आशीष मिश्रा ने बताया, ”हमने रोज 20 घंटे तक काम कर डाटा जुटाया। मुद्दे उठाने के लिए कई आरटीआई फाइल कीं। सबसे खास बात यह थी कि इलेक्शन कैम्पेन में सर्बानंद सोनोवाल के पोस्टर के साथ कांग्रेस कैंडिडेट तरुण गोगोई की बजाय किसी छोटे या जूनियर नेता का फोटो लगाया जाता था। इसके पीछे स्ट्रैटजी यह थी कि पूरे कैम्पेन में गोगोई को वेटेज न मिले और जनता के बीच उनकी रिकॉल वैल्यू कम रहे।”

 

– शिखा का कहना है, हम यूपी में BJP के लिए कैंपेन के लिए तैयार हैं। आखिरी फैसला पार्टी हाईकमान को करना है। हमारी स्ट्रैटजी थी कि कांग्रेस खुद कुछ नया कैंपेन करने की जगह हमारे कैंपेन का रिस्पॉन्स एंड ही बनी रहे। और ऐसा ही हुआ।
असम के लिए क्या थी स्ट्रैटजी?
– बीजेपी ने पब्लिक के बीच डायलॉग सीरिज चलाई, टी लेबर्स, एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और सोशल वेलफेयर जैसे मुद्दों को उठाया।
– पार्टी ने जनरल सेक्रेटरी राम माधव, कांग्रेस से बीजेपी में आए हिमंता बिस्वा सर्मा, महेंद्र सिंह और रजत सेठी को जिम्मा सौंपा।
– इसी टीम की स्ट्रैटजी के मुताबिक, बीजेपी ने सबसे पहले असम की लोकल पार्टियों के साथ अलायंस किया।
– कांग्रेस के पास इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग, टी वर्कर्स के लिए रिलीफ पैकेज जैसे मजबूत मुद्दे थे।
– हमने बीजेपी नेताओं की रैलियों के जरिए ‘असम निर्माण’ सीरिज चलाई। इनमें छोटो-छोटे मुद्दों को उठाया।

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